हमारे देश में सबसे ज़्यादा हिंदी भाषा बोली जाती है. हालांकि हिंदी को राजभाषा बनाने को लेकर एक अलग बहस थी. जो लोग किसी और भाषा को अपनी भाषा से ज़्यादा अच्छी तरह से जानते हैं उनके लिए ये अच्छी बात है. पर गर वो अपनी भाषा को नहीं जानते तो ये बहुत बुरी बात है. आज हम आपको ऐसे शब्दों से रू-ब-रू करवाने जा रहे हैं जो हिंदी के हैं पर इंग्लिश में अच्छे से उपयोग में लाये जाते हैं.
हेल्थ केयर नेटवर्क Oxxy ने घोषणा की है कि वो देश में पैदा होने वाली हर बच्ची के नाम पर 11 हज़ार का फिक्स्ड डिपाज़िट कराएगा. भारतीय महिला खिलाड़ियों के रिओ ओलिंपिक में शानदार प्रदर्शन के बाद ये घोषणा की गयी है. आज हर कोई ये बात मानता है कि यदि लड़कियों को अवसर मिलें तो वो हर मुकाम हासिल कर सकती हैं.
Oxxy एक 3 साल पुरानी कंपनी है. इसे हेल्थ केयर मार्केट में ज़्यादा समय नहीं हुआ है पर इसका काम प्रभावशाली है. अब तक ये भारत में 15 मिलियन लोगों की स्क्रीनिंग कर चुकी है.
कंपनी का मकसद है कि आने वाली पीढ़ी में स्वस्थ लड़कियां हों जो लड़कों से किसी मायने में कम न हों, जिन्हें देश में एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके. इस पहल से ये हर लड़की को स्वर्ण पदक लाने के काबिल बनाना चाहते हैं.
इसके अलावा ये कंपनी प्रेगनेंट औरतों को शिक्षित करने की ज़िम्मेदारी भी उठा रही है. वो उन्हें Tests और इस दौरान सावधानी बरतने की एहमियत समझाएगी. उम्मीद है इससे शिशु मृत्यु दर कम होगी.
भारत में जहां आज भी कई लोग लड़कियों को बोझ समझते हैं, वहां इस तरह की पहल ऐसे लोगों की मानसिकता बदलने में मदद कर सकती है.
कुश्ती की बात हो, तो हरियाणा का जिक्र अपने आप ही होने लगता है, और हो भी क्यों न? आख़िरकार इस धरती ने सुशील कुमार से लेकर योगेश्वर दत्त, गीता फोगाट से लेकर साक्षी मलिक जैसे पहलवान जो देश को दिए हैं. इसी लिस्ट में नया नाम दीपक पुनिया का भी शामिल हो गया है.
Source: sports
Kyrgyzstan, जॉर्जिया, यू.एस.ए और तुर्की जैसे देशों के पहलवानों को धूल चटाने वाले दीपक के पिता दूध बेचने का काम करते हैं. खुद दीपक को भी गाय का दूध बहुत पसन्द है, पर फ्रांस में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप हारने के बाद जब दीपक खाली हाथ घर लौटे, तो दीपक के पिता ने उन पर दूध की पाबंदी लगा दी.
Source: indianexpress
इसके बाद दीपक ने दोबारा से मेहनत शुरू की और 85 किलो वर्ग में गोल्ड मेडल हासिल किया. इसी के साथ दीपक, सुशील कुमार जैसे हेवी वेट पहलवानों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं.
7 साल की उम्र से अखाड़े में पहलवानी के गुर सीख रहे दीपक, द्रोणाचार्य से सम्मानित पहलवान सतपाल गुरु से पहलवानी सीख चुके हैं.
इससे पहले भी दीपक एशियाई चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीत चुके हैं. आगे उनका सपना 2020 ओलम्पिक में भारत की तरफ से खेलना है.
कहते है कि एक बड़े युद्ध से पहले और युद्ध के बाद गहरी शांति छा जाती है. कभी-कभी कोल्ड वॉर का दौर शुरू हो जाता है और तब ऐसा लगने लगता है कि अब युद्ध होकर रहेगा, पर वास्तव में उस वक़्त युद्ध नहीं होता. वो बिगुल होता है एक विध्वसंक युद्ध का. विश्व अभी तक दो युद्धों से गुज़र चुका है. पर क्या संभावना है तृतीय विश्व युद्ध के होने की? हालात कुछ ऐसे बनते नज़र आ रहे हैं, जिनको देख कर वर्ल्ड वॉर की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता. आजकल विश्व के विभिन्न सम्मेलनों में दो देशों के प्रतिनिधियों के चेहरे पर असंतुष्टि के भाव देखे जा सकते हैं. ये बिलकुल वैसा ही संकेत है, जैसा सेकंड वर्ल्ड वॉर के समय देखने को मिला था. विश्व के तमाम देश अपनी सहूलियत के हिसाब से ग्रुप बनाने में जुट गए थे. दूसरी ओर ISIS नाम का आंतकवादी संगठन दुनिया की मुश्किलें और बढ़ा रहा है.
आइये जानते हैं अगर अगला विश्व युद्ध होगा तो उसके मुख्य कारण क्या-क्या होंगे?
1. सीरिया मुद्दा
सीरिया में गृह युद्ध 2011 में शुरू हुआ था. उस समय आन्दोलनकारियों ने अपने शासक बशर-अल-अस्सद के खिलाफ़ हथियार उठा लिए थे. कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि इसमें अमेरिका का हाथ था. अस्सद के खिलाफ़ बगावत में इस्तेमाल किये गये सारे हथियार और विद्रोह के लिए सारा पैसा अमेरिका से आया था. वहीं दूसरी ओर, अस्सद रूस का समर्थक था और रूस ने उसको शासक बनाए रखने के लिए विद्रोहियों का दमन करने में मदद की. रूस को ये भी लग रहा था कि अमेरिका सीरियाई क्षेत्र को हथियाना चाहता था.
इस्लामिक स्टेट भी इस पर कब्ज़ा जमाने की फिराक में है. रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कई बार ऐसा कहा है कि IS अमेरिका का बनाया एक आतंकी संगठन है और वो उसी के पैसों पर जीता है. अमेरिका ने इसका विरोध किया है और IS के दमन के लिए वहां अपनी फौज भेज डाली. रुस ने भी वहां IS की टुकड़ियों को मिटाने के लिए फाइटर प्लेन से हमला किया. तुर्की का विरोध और रूस से उसका उलझना, फिर US का बीच-बचाव ऐसे कई वजह हैं, जिनके कारण दोनों देशों में अब तक तनातनी का माहौल है.
2. East and South China Sea (China Vs Japan, Vietnam, Philippines led by US)
जब से जापान, वियतनाम और फ़िलीपीन्स ने East and South China Sea के विभिन्न हिस्सों पर अपना हक जताया है, तब से चीन उनका विरोध कर रहा है. अब ये मुद्दा वैश्विक मुद्दा बनता जा रहा है. पूर्व में, चीन और जापान एक दूसरे से Senkaku Islands से जुड़ते हैं. ये आइलैंड बहुत ही खास है और इसके साथ एक और Diaoyu Islands आइलैंड इन दोनों देशों की कलह का मुख्य कारण है.
अब दक्षिणी चीन सागर के साथ समस्या ये है कि इसके साथ एक आइलैंड जुड़ा है, जो चीन से ज़्यादा फिलीपींस के करीब है, पर दोनों देश इस पर अपना दावा करते हैं. पर अभी इस पर चीन का कब्ज़ा है. चीन ने इंटरनेशनल ट्रिब्यून का फैसला भी मानने से इंकार कर दिया है. इस फैसले में कहा गया था कि ये आइलैंड फिलीपिंस का हिस्सा है. चीन की ऐसी मनमानी से वैश्विक खतरा बढ़ता जा रहा है.
3. Russia-Ukraine Over Crimea
रुसी संघ ने क्रीमिया को 2014 में मिला लिया था. उससे पहले ये यूक्रेन का एक स्वशासित अंग था.पर राष्ट्रपति पुतिन ने कई वैश्विक शक्तियों का सहारा लेकर उसे अपने आधीन कर लिया. उस समय तो ये मसला ठंडा पड़ गया था, पर उसके बाद विश्व में गुट बनने लगे. चीन रूस का खुलेआम समर्थन कर रहा है, तो US युक्रेन के साथ है. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने एक घोषणा की थी कि हम रूस को युक्रेन की जनता का हक नहीं खाने देंगे. सीरिया के बाद ये दूसरा मसला है, जहां रूस और अमेरिका उलझे हुए हैं.
4. India vs Pakistan Over Kashmir
दो नाभिकीय हथियारों से संलग्न देश ज़मीन के टुकड़े के लिए बुरी तरह उलझे हुए हैं. पाकिस्तान अभी बहुत ही बुरे हाल में है, वो अपने घर में पैदा हो रहे आंतकवाद का स्वभोगी है. 1947 में आज़ादी मिलने के बाद पाकिस्तान ने जब जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों पर हमला कर दिया तो वहां के राजा ने भारत से बचाव की गुहार लगायी. तब तक जम्मू किसी भी देश का हिस्सा नहीं था. भारत ने उनकी मदद की और बदले में उनसे भारत में विलय होने के दस्तावेज पर हस्ताक्षर भी करवाए. उसके बाद से अब तक इसके लिए दोनों देशों के बीच 4 लड़ाईयां लड़ी जा चुकी हैं. पाकिस्तान को कथित रूप से चीन का समर्थन प्राप्त है. ऐसे में ये युद्ध फिर होता है, तो कई देशों के लिए खतरा हो जाएगा.
अगर आप भी इस जानकारी से इत्तेफाक़ रखते हैं, तो इसे शेयर करें.